आख़री हिचकी से पहले चारा-गर से पूछ लूँ
जो नज़र आता नहीं रिश्ता कहाँ ले जाएगा
कुछ तो है बात जो आती है क़ज़ा रुक रुक के
ज़िंदगी क़र्ज़ है क़िस्तों में अदा होती है
जो नज़र आता नहीं रिश्ता कहाँ ले जाएगा
कुछ तो है बात जो आती है क़ज़ा रुक रुक के
ज़िंदगी क़र्ज़ है क़िस्तों में अदा होती है
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